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रूपरेखा

इतिहास

  संगठनात्मक संरचना

  अवलोकन

 


1.     1947 में उच्च रक्षा संगठन और प्रशासन का अनुभव बहुत ही थोड़े भारतीयों को था । पाकिस्तान प्रेरित कश्मीर कब्जे ने ऐसे संगठन के विकास की रफ्तार को बढ़ावा दिया । सरकार और रक्षा समस्याओं पर सलाह देने के लिए कई समितियां बनीं, जिसमें मुख्य है मंत्रिमण्डल (केबिनेट) में रक्षा समिति, जिन्हें अन्य समितियों द्वारा समर्थन मिला, जैसे रक्षा मंत्री की समिति(डी एम सी), चीफ ऑफ स्टाफ समिति (सी ओ एस सी), संयुक्त योजना समिति (जे पी सी) और संयुक्त आसूचना समिति (जे आई सी) ।


2.      बाद के वर्षों में, कश्मीर युद्ध विराम के बाद और भारत की शांति तथा गुटनिरपेक्षता की नीति के प्रति दृढ़ता से अधिकांश समितियां मृतप्रायः हो गईं और उनके कार्य संयुक्त होते चले गए ।


3.     1962 में चीनी आक्रमण के बाद, केबिनेट की रक्षा समिति का स्थान केबिनेट की आपात समिति ने ले लिया, पहले के विपरीत सेवा प्रमुखों और रक्षा सचिव के शामिल होने की अनिवार्यता को हटा दिया । डी एम सी को संक्रियात्मक विकास की छानबीन शामिल करने और रक्षा तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए पुनः दुरूस्त किया गया । रक्षा संरचना को गति देने के लिए अन्य कई समितियां अस्तित्व में आईं । तथापि आसन्न चीनी आक्रमण जब क्षीण हो गया, तो इन समितियों में अधिकांश पुनः मृतप्रायः हो गईं ।


  रक्षा मंत्रालय (सैन्य विंग)  

4.     उच्च रक्षा संगठन के सुगम कार्य की सुनिश्चितता के उद्देश्य से 01 नवम्बर 1947 से मंत्रिमण्डल सचिवालय में एक सैन्य विंग की स्थापना की गई । तथापि, विचार-विमर्श के बाद सैन्य विंग को बाद में रक्षा मंत्रालय (एम ओ डी) के अधीन कर दिया गया।


5.     संरचना : रक्षा मंत्रालय (सैन्य विंग) का नेतृत्व संयुक्त सचिव (सैन्य) द्वारा किया जाता है जो कि मेजर जनरल/समतुल्य रैंक के अधिकारी द्वारा बारी-बारी से किया जाता है । संयुक्त सचिव (सैन्य) सीधे रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करता है ।

6.     कार्य/उत्तरदायित्व : संयुक्त सचिव (सैन्य) को निम्न कार्य/उत्तरदायित्व दिए गए :-


  (क)     रक्षा को प्रभावित करने वाली प्रवृत्तियों और सभी महत्वपूर्ण विकास के बारे में रक्षा सचिव के माध्यम से मंत्रिमण्डल सचिव को अवगत कराना तथा उसे विशेष रूप से सी ओ एस सी तथा रक्षा मंत्री के तहत अन्य उपसमितियों के सम्मुख आने वाली समस्याओं से परिचित कराना ।

(ख)     विभिन्न मंत्रालयों/राज्य सरकारों, पुनरीक्षण, संशोधन, प्रकाशन और यूनियन वार बुक पर प्रगति रिपोर्ट के मामलों को देखना ।

(ग)     रक्षा मंत्रालय में भली-भांति निर्मित सैन्य मशीनरी मुहैया कराना, जो आक्रमण की शुरूआत की स्थिति में रक्षा युद्ध-नीति से संबंधित विभिन्न विवरणों की व्याख्या करने की स्थिति में हो ।

(घ)    सी सी पी ए अनुमोदन की आवश्यकता वाले रक्षा से संबंधित सभी कागजातों पर प्रक्रिया पूरी करते हुए संक्षिप्त सार (ब्रीफ) तैयार करना ।

(ङ)     उच्चतर रक्षा समस्याओं के प्रति रक्षा मंत्री और सी ओ एस सी के मध्य एक आवश्यक और उपयोगी सम्पर्क सूत्र प्रदान करना।

(च)     संयुक्त संक्रियात्मक योजना के सभी पहलुओं पर कागजात लिखना, चर्चाएं करना और जे पी सी के साथ नजदीकी समन्वय करना।

(छ)     साउथ ब्लॉक में पहली बार युद्ध कक्ष परिसर में नियंत्रण कक्ष/संयुक्त सेवा ब्रिफिंग कक्ष की स्थापना करना और कार्यकलापों के लिए जिम्मेवार होना ।

(ज)     तीनों सेनाओं की संचार इलेक्ट्रानिक आवश्यकताओं का समन्वय करना, दूरसंचार की उपस्कर गुणात्मक आवश्यकताओं के मानकीकरण को शामिल करना, सामान्य उपस्कर का आबंटन, संयुक्त सिग्नल योजना तैयार करना, तीनों सेवाओं/रक्षा मंत्रालय द्वारा आवश्यकता पड़ने पर सैन्य संचार/इलेक्ट्रानिक्स मुद्दों पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना तथा उनके पोजीशन कागजात तैयार करना ।

(झ)     सी ओ एस सी के निर्देशों के तहत संयुक्त कमाण्डर सम्मेलन का गठन, समन्वय और संचालन करना।

(ण)     स्पेक्ट्रम नीति और फ्रिक्वेंसी के आबंटन/राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण द्वारा बनाए फ्रिक्वेंसी स्पेक्ट्रम नीति के फ्रेमवर्क के अन्तर्गत और उस पर सरकार के ऐसे आदेश के विषय, जहां भी आवश्यक हो, राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण से परामर्श करके, सेवा में की गई फ्रिक्वेंसी की आवश्यकताओं का समन्वय और आबंटन करना ।
 
     
  (ट)     निम्नलिखित के लिए सचिवालय मुहैया कराता है :-  

 
(i) मंत्रिमण्डल (केबिनेट) के रक्षा सचिव, चूंकि (सी सी पी ए) द्वारा प्रति-स्थापित  
(ii) रक्षा मंत्री की समिति ।  
(iii) स्टाफ समिति के प्रमुख (सी ओ एस सी) ।  
(iv) वार बुक समिति ।  
(v) वार बुक कार्यान्वयन समिति ।  
(vi) प्रधान कार्मिक अधिकारी समिति ।  
(vii) प्रधान आपूर्ति अधिकारी समिति ।  
(viii) रक्षा मंत्री की उत्पादन एवं आपूर्ति समिति ।  
(ix) संयुक्त योजना समिति ।  
(x) संयुक्त प्रशिक्षण समिति ।  
(xi) संयुक्त समुद्री वायु युद्धस्थिति समिति ।  
(xii) संयुक्त प्रशासनिक योजना समिति ।  
(xiii) अंतर सेवा उपस्कर नीति समिति ।  
(xiv) प्रधान अनुरक्षण अधिकारी समिति ।  
(xv) संयुक्त संचार इलेक्ट्रानिक्स समिति ।  
(xvi) संयुक्त इलेक्ट्रानिक्स युद्धस्थिति बोर्ड ।  
(xvii) संयुक्त वैद्युत चुम्बकीय संगतता प्रबन्धन परामर्शी बोर्ड ।  
 


7.     संयुक्त सचिव (सैन्य) के संगठन को मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के गठन पर एकीकृत स्टाफ में विलय कर दिया गया ।



  रक्षा के लिए योजना  

8.     रक्षा योजना में केवल संक्रियात्मक योजना ही नहीं होती, बल्कि बल स्तरों के लिए महत्वपूर्ण योजना भी होती है । इसके अलावा सशस्त्र बलों का गठन और उनको सुसज्जित करने का कार्य होता है । ये सभी पहलू एक-दूसरे से संबंधित तथा परस्पर निर्भर रहने वाले हैं । आकस्मिक संक्रियात्मक योजना को छोड़कर, सभी रक्षा योजनाएं दीर्घकालिक अवधि पर आधारित होती है । प्रथम, सुरक्षा पर कोई खतरे से बचने के लिए ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी भविष्य के खतरों का सामना करने के लिए भी होती हैं, दूसरे यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक विकास और रक्षा योजना के बीच एक उचित संतुलन कायम रह सके ।


9.     स्वतंत्रता के बाद, 1964 के पूर्व तक, रक्षा योजना वार्षिक आधार पर बनाई गई । प्रथम 6 वर्ष की रक्षा योजना 1964 में बनाई गई, तथापि यह पांच वर्षों के लिए उनके वार्षिक बजट से अधिक नहीं है । 1970-74 की रक्षा योजना समग्र रक्षा प्रणाली की आवश्यकताओं की दीर्घ अवधि भविष्यवाणी को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय संसाधनों के भीतर बनी । इसके अनुसरण में 1970-75 तक आगे बढ़ाने की योजना चली, जिसमें नियोजित अवधि के भीतर एक वर्ष से अगले में निधि आबंटन, व्यय और लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई । 1971 की घटनाओं ने हालांकि इन सभी धारणाओं को गलत साबित किया और इस प्रकार दीर्घकालिक अवधि वाली धारणाओं के स्थान पर तात्कालिक आवश्यकता की धारणा को वरीयता दी गई और इस प्रकार प्राथमिकताएं बदल गईं ।


10.     1973-74 में एक उच्च स्तर योजना समूह का गठन योजना मंत्री के अधीन 1974-79 की रक्षा योजना पर विचार करने के लिए किया गया, जिसका मुख्य जोर आक्रमण के उच्च स्तर के विरूद्ध भव्य योजना को पुनरीक्षित करना और उसके बाद राष्ट्रीय विकास योजना से जोड़ते हुए रक्षा और विकास के बीच पूरक संबंध सुनिश्चित करते हुए पुनरीक्षित करना था ।



  रक्षा योजना स्टाफ (डी पी एस)  


11.     रक्षा मंत्रायल के अधीन सीओएससी की मदद के लिए 1986 में एक उच्च स्तर के अन्तर सेवा रक्षा योजना स्टाफ (डी पी एस) का गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ अन्तर सेवा स्टाफ सहित रक्षा मंत्रालय, रक्षा (वित्त), विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि और डी आर डी ओ में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल थे ।


12.     संरचना.. डी पी एस का नेतृत्व महा निदेशक रक्षा योजना स्टाफ (डी जी डी पी एस) द्वारा क्रमावर्तन आधार पर तीनों सेनाओं के ले0 जनरल/समतुल्य रैंक के अधिकारी द्वारा बारी-बारी से किया जाता था । डी पी एस में निम्न प्रभाग होते हैः-.

  (क) अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग ।
(ख) आयुध एवं उपस्कर प्रभाग ।
(ग) सैन्य योजना प्रभाग ।
(घ) नीति योजना प्रभाग ।

* डी जी डी पी एस की स्थिति उप प्रमुख/पी एस ओ की होती है और ये सी ओ एस सी को सीधे रिपोर्ट करते हैं ।


13.
    कार्य. रक्षा योजना स्टाफ (डी पी एस) को सेवा मुख्यालयों, रक्षा उत्पादन और आपूर्ति विभाग तथा डी आर डी ओ के योजना निदेशालयों से प्राप्त प्रक्षेपित प्रस्तावों पर आधारित सापेक्ष महत्व की समन्वित रक्षा योजना की तैयारी के लिए जिम्मेदार बनाया गया । डी पी एस को आवधिक रूप से खतरे का आंकलन करना था, ताकि बल स्तरों तथा अस्त्र-शस्त्रों के मिश्रण का विकास हो सके तथा खतरों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं की आवश्यकताओं को एकीकृत किया जा सके । डी पी एस को हमारे सैन्य हितों के क्षेत्रों का अध्ययन भी करना था, जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्षा योजनाएं खतरों की ओर अभिमुख हो, जिसका सामना देश अगले दशक में करेगा तथा साथ ही देश के भीतर उपलब्ध संसाधनों से इष्टतम रूप से खतरों से निपटने में एकीकृत रूप से अपनी क्षमताएं सुनिश्चित करना ।


14.
     डी जी डी पी एस के संगठन को मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के गठन पर एकीकृत स्टाफ में विलय कर दिया गया ।


  कारगिल युद्ध के पश्चात् विकास  

15.
     कारगिल संघर्ष के बाद सरकार ने देश में सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के विश्लेषण और गहन पुनरीक्षण करने के लिए कारगिल पुनरीक्षण समिति का गठन किया । कारगिल पुनरीक्षण समिति की सिफारिशों पर मंत्रियों के समूह द्वारा विचार किया गया, जिन्होंने चार टास्क बलों द्वारा किए विश्लेषण के आधार पर कार्यान्वयन के लिए विशेष प्रस्ताव दिए ।

>>> रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से सिफारिशों को डाउनलोड करें ।


16.     मंत्री समूह की अनुशंसा पर आधारित, एकीकृत रक्षा स्टाफ, भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय के पत्र संख्या रक्षा मंत्रालय/आईसी/1027/32/आईडीएस/5843/2001 दिनांक 23 नवम्बर 2001 द्वारा स्थापित किया गया ।
 



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