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        अनुसन्धान > अस्तित्व के प्रथम वर्ष पर रिपार्ट


मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ; अस्तित्व में आने के पहले वर्ष पर एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख द्वारा अध्यक्ष स्टाफ समिति प्रमुख को दी गई रिपोर्ट



परिचय
 
   
  1.    एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख के अध्यक्ष स्टाफ समिति प्रमुख (CISC) की नियुक्ति 01 अक्टूबर 2001 को हुई और मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आई डी एस) की स्थापना 23 नवम्बर 2001 के सरकारी पत्र से हुई । शुरूआत करते हुए सर्वप्रथम पूर्व के महानिदेशक, रक्षा योजना स्टाफ (डी जी, डी पी एस) और संयुक्त सचिव (सैन्य विंग) (सं.स. (सैन्य)) नए सृजित मुख्यालय में विलय कर दिया गया । अन्य स्टाफ की तैनाती जनवरी 2002 में प्रारम्भ हुई । प्रक्रिया अभी भी जारी है और पूर्ण स्टाफ जैसाकि प्राधिकृत है- अधिकारी, अधिकारी से नीचे रैंक के कार्मिक (पी बी ओ आर) एवं सिविलियन की तैनाती अभी बाकी है । स्टाफ की कमी/अनुपस्थिति के बावजूद भी मुख्यालय ने 01 फरवरी 2002 से गम्भीर रूप से कार्य करना प्रारम्भ कर दिया ।  



 
कार्य का विश्लेषण  
   
  2.    सामान्य रूप से मुख्यालय आई डी एस और विशेष रूप से सी आई एस सी की चार्टर ऑफ ड्यूटी का विश्लेषण बताता है कि उच्च रक्षा प्रबंधन का सम्पूर्ण कार्य मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है । ये हैः-
 
(क) रक्षा प्रबंधन ।
(ख) रक्षा प्रशासन ।
(ग) युद्ध प्रबंधन ।
 
   
  3.     इनमें से जो अंतिम है वह सेवा प्रमुखों द्वारा निर्देशित सक्रिय कमानों के विभिन्न कमाण्डर-इन-चीफ के सक्षम हाथों में है, सिवाय त्रिसेवा के मामले में ‘क्षेत्र से बाहर‘ के ऑपरेशन में, जिसमें सक्रिय औपचारिक समन्वय और कमान और नियंत्रित संरचना की आवश्यकता होती थी । उपान्तिम की भी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के सम्मिलित प्रयासों और प्रधान स्टाफ अधिकारी (पी एस ओ) के द्वारा भलीभांति व्यवस्था की जाती है जो कि प्रशासकीय कार्य जैसे ऐजी, क्यूएमजी, सेना के एमजीओ, नौसेना के सीओपी और सीओएम और वायुसेना के एओपी और एओएम से संबंधित है ।  
   
  4.    तथापि, पहले वाले में, जिसमें ढेर सारे क्रियाकलाप निहित थे और विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेन्सियों, डी आर डी ओ, उद्योगों, इत्यादि के साथ आवश्यक सतत पूर्णकालिक सक्रिय परस्पर क्रियाकलाप शामिल थे, जिसमें कुछ सीमा तक सेवाओं की भागीदारी का अभाव था । एक चैतन्य निर्णय अब किया गया, ताकि मुख्यालय आईडीएस एवं उनके स्टाफ के इस दिशा की ओर प्रयासों को केन्द्रित किया जा सके ।  
   
  5.     इसके अतिरिक्त मुख्यालय आईडीएस स्थापित होने के साथ सी ओ एस सी ने कार्यपालक रखा है, जो उनके निर्णयों को क्रियान्वित करता है । पहले सीओएससी के पास डीजी, डीपीएस और जेएस (सैन्य) होते थे, जो उन्हें क्रमशः ‘विचार मंच‘ और सचिवालय प्रदान करते थे, किन्तु उनका कोई स्टाफ नहीं होता था, जो उनके निर्णयों को प्रभाव दे और उनके क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग करे । सी आई एस सी होने के नाते मैंने इस उत्तरदायित्व को लिया है । इस लक्ष्य की ओर सी ओ एस सी उपसमिति का नामकरण फिर से किया गया है और कुछ नए बनाए गए हैं ।  



 
नीति, योजना और बल विकास शाखा  
   
  6.     इस शाखा का एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व अधिग्रहण प्रक्रिया से संबंधित है । नई अधिग्रहण प्रणाली के अन्तर्गत आई डी एस का उप प्रमुख जो कि शाखा का प्रमुख है, रक्षा अधिग्रहण परिषद (डी ए सी) का पदेन सदस्य सचिव होता है, जिसका सभापतित्व रक्षा मंत्री (आर एम) द्वारा सेवा प्रमुखों, रक्षा मंत्रालय के सचिवों और सी आई एस सी के साथ इसके सदस्यों के रूप में किया जाता है । इसमें त्रि-सेवा 15 वर्षों की ‘दीर्घ अवधि-संदर्भ योजना‘ (एल टी पी पी) और वरीयतायुक्त त्रि-सेवा पांच वर्षों की योजना की तैयारी शामिल हैं । इनमें से अब हम एल टी पी पी के निर्माण की प्रक्रिया की ओर अग्रसर है या बल्कि तीनों सेवाओं के प्रयासों का समन्वय कर रहे हैं । जैसाकि प्रशंसनीय है, यह दस्तावेज सैद्धांतिक प्रकृति का है । यह और भी अधिक इसलिए है चूंकि इस कार्य में कोई भी सेवा ने गम्भीर रूप से प्रयास नहीं किया जबकि इसमें एक प्रतिबद्धता थी । राष्ट्र के प्रति दृष्टिकोण के बारे में सेवा प्रमुखों के साथ भी हमारी वार्ता हो रही है, सशस्त्र बलों और 15 वर्षों की उनकी सेवा के बारे में वार्ता हो रही है । इससे पहले कि ज्यादा उम्मीदें लगाई जाएं, यह स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि इस चरण पर एल टी पी पी की चिरकालिक दस्तावेज बनने की प्रवृत्ति नहीं है, चूंकि इसमें राष्ट्रीय युद्ध नीति, विदेश नीति, आर्थिक विकास, इत्यादि के बड़े मुद्दे शामिल हैं ।  
   
  7.    हालांकि स्पष्ट रूप से कहा जाए तो वार्षिक अधिग्रहण योजना रक्षा प्रापण बोर्ड (डीपीबी) की जिम्मेवारी है ना कि पी पी और एफ डी की, जिसका कारण यहां नहीं बताया जा सकता । यह उत्तरदायित्व भी हमारे पास आया है, कम से कम दसवीं योजना अवधि के प्रथम दो वर्षों के लिए ।  
   
  8.     28 मई 2002 को हुई पहली डी ए सी की बैठक में निजी उद्योगों की सहभागिता के प्रश्न पर भी चर्चा हुई । मुख्यालय आई डी एस को विस्तृत रूप से इस प्रश्न पर अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया । तद्नुसार, एक अध्ययन दल का गठन किया गया, जिसमें दो स्टार रैंक वाले अफसरों के अन्तर्गत विभिन्न जुड़े मुद्दे सौंपे गए । दल ने निजी उद्योग और विविध सरकारी एजेन्सियों के साथ सम्पर्क किया । सी आई एस सी ने श्री अतुल किर्लोस्कर, अध्यक्ष सीआईआई के साथ भी चर्चा की । रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्रों की बढ़ी सहभागिता और हमारी रक्षा आवश्यकताओं से संबंधित पत्र को तैयार किया गया और अलग से पेश किया जा रहा है ।  
   
  9.     मुख्यालय आई डी एस के अस्तित्व में आने के पहले दसवीं योजना का दस्तावेज पहले के डी जी, डी पी एस द्वारा तैयार कर लिया गया था । चूंकि इसके लिए निधि उपलब्ध कराने के संकेत न मिलने पर यह ‘वरीयता‘ प्राप्त दस्तावेज न बन सका, किन्तु इसने प्रत्येक सेवा की अपनी वरीयताओं पर जरूर संकेत दिया । यह दस्तावेज अभी रक्षा मंत्रालय के विचाराधीन है ।  
   
  10.     हमारे द्वारा की गई बड़ी कोशिश में डी आर डी ओ के साथ सम्पर्क करना रहा । पिछले वर्ष के प्रारम्भ में डी जी, डी पी एस ने “स्ट्रेटिजिक एण्ड टेक्नोलोजिकल एनवायरमेंट एसेसमेण्ट“ शीर्षक से एक दस्तावेज प्रस्तुत किया था । यह दस्तावेज एकपक्षीय था, चूंकि डी आर डी ओ ने कार्यालीय रूप से इसका समर्थन नहीं किया था । अब रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार तथा सचिव डी डी पी एवं एस के लिए आवश्यक हो गया कि प्रत्येक बड़े अधिग्रहण प्रस्ताव को या तो ‘बना‘, ‘खरीदा और बनाया‘ या ‘खरीदा‘ के श्रेणीकरण की सहमति लेने से पहले डी ए सी से सिद्धांत रूप में स्वीकृति लेनी होगी, इससे एल टी पी पी की तैयारी में और पांच वर्षों की योजना में भी उनका शामिल होना आवश्यक होगा । हमने अब पी पी एण्ड एफ डी शाखा से दो स्टार रैंक वाले अधिकारी के अन्तर्गत एक “होराईजन कोर टेक्नोलोजी कमेटी“ का गठन किया है, जिसमें तीनों सेवाओं, डी आर डी ओ और डी डी पी एण्ड एस के प्रतिनिधि होते हैं । हम यह मामला भी उठा रहे हैं कि इस समिति का नामांकन सी ओ एस सी के एक उपसमिति के रूप में हो सके ।  
   
  11.     इस शाखा के अन्य कार्यों में अन्तर्राष्ट्रीय सेना के साथ हमारी सेना का सहयोग करना शामिल है । भारत-यू एस एक्जिक्यूटिव सर्विस ग्रुप के सिवाय जो कि सेवा विशेष से सम्बद्ध है और जिसका उस सेवा के अधिकारी द्वारा ही सभापतित्व किया जाता है, इस फील्ड में अन्य सभी समितियों में मुख्यालय आई डी एस के अधिकारी ही सभापतित्व करते हैं । प्रथम भारत-यूएस ‘संयुक्त‘ स्टाफ वार्ता दस दिनों की अवधि में वाशिंगटन में हुई जिसमें मुख्यालय आई डी एस के अधिकारियों ने भाग लिया और भारतीय संयुक्त स्टाफ का प्रतिनिधित्व किया ।  
   



 
ऑपरेशन शाखा  
   
  12.    क्षेत्र के बाहर की आकस्मिकताएं (ओओएसी) - . रक्षा मंत्री के संक्रियात्मक निदेशों के आधार पर ओ ओ एस सी के लिए उद्देश्य और आकस्मिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है ।  
   
  13.    आपदा प्रबंधन - . एक त्रिसेवा संयुक्त प्रतिक्रिया योजना जारी की गई है । साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संबंधित मुद्दों पर रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय स्तर पर संपर्क हुए हैं और बेहद उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं ।  
   
  14.    सी 412 - . राष्ट्रीय कमान पोस्ट (एन सी पी) में राष्ट्रीय कमान प्राधिकारी के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली के रूप में कार्य करने के लिए डाटा फ्यूजन केन्द्र (डी एफ सी), राष्ट्रीय सी पार के माड्यूल की अवधारणा बनाई जा रही है ।  
   
  15.    नाभिकीय मुद्दे - . इस क्षेत्र में किस स्तर तक कार्य हो चुका है, यह बताने के लिए मैं स्वतंत्र नहीं हूं । फिर भी काफी कार्य किया गया है और उन्नति पर है ।  




 
नीति, संगठन और प्रशिक्षण (डी ओ टी) शाखा  
   
  16.    सामान्य प्रशासन - . मुख्यालय आई डी एस की स्थापना के बाद यह शाखा सबसे अधिक व्यस्त है । इन्हें आवास के जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण कार्य देखना पड़ता है, एक ऐसा कार्य जो अभी भी जारी है, स्टाफ की तैनाती जो अभी भी अधूरी है, एस ओ पी का लिखना और विभिन्न अन्य मिलती-जुलती प्रशासनिक जिम्मेदारियां । इसी तरह, सभी लेखा और घरेलू बजटीय मामलों को नौसेना मुख्यालय से हस्तांतरित कर दिया गया है और इसे पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ के बगैर कार्य करना है । इन सबके बावजूद शाखा ने घरेलू संगठन और प्रशासन में उल्लेखनीय कार्य किया है ।  
   
  17.    प्रशिक्षण -. प्रशिक्षण के लिए जी ओ एम की सिफारिशों के आधार पर सी ओ एस सी ने प्रशिक्षण संसाधनों के अधिकतम बेहतर उपयोग के लिए संयुक्त प्रशिक्षण हेतु त्रिसेवा समिति का आयोजन किया । समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है जिसे सी ओ एस सी को पेश किया जा चुका है और उसका सेवा मुख्यालय द्वारा विस्तृत रूप से विश्लेषण किया गया है । सी ओ एस सी को प्रस्तुत किए जाने वाले इस विश्लेषण का अंतिम प्रस्तुतीकरण प्रगति पर है ।  
   
  18.    राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय समिति (सी ओ एन डी यू) - . राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के गठन पर समिति, जिसकी अध्यक्षता श्री के. सुब्रमण्यम ने की थी, ने अपनी रिपोर्ट को 29 मई 02 को रक्षा मंत्री को सौंपी थी और बाद में सी ओ एस सी को। समिति ने बहुत सी सिफारिशें दी हैं, जिन पर अब सेवा मुख्यालय में अध्ययन हो रहा है । क्रियान्वयन पहलू पर इसके समेकित विचारों को सी आई एस सी के विचारार्थ रखा जाएगा । सी ओ एस सी ने कार्यान्वयन सेल के सेवा सदस्य के रूप में डीसीआईडीएस (डीओटी) का नामांकन किया है जिसकी अध्यक्षता रक्षा सचिव करेंगे ।  
   
  19.    सिद्धांत - . सभी तीनों सेवाओं के लिए संयुक्त सिद्धांत की तैयारी पर कार्य आरंभ हो चुका है । आई डी एस ए और यू एस आई के साथ पहले से ही संपर्क किया जा चुका है । मख्यालय ए आर टी आर ए सी और सेवा मुख्यालयों के साथ संपर्क किया जा रहा है । यह योजना बनाई गई है कि पहले संयुक्त सिद्धांत का मसौदा तैयार किया जाए और उसे विभिन्न ‘क‘ श्रेणी प्रशिक्षण संस्थान और सेवा मुख्यालय को वितरित किया जाए ताकि उनके विचार जाने जा सकें । हम कुछ और अधिक महत्वपूर्ण तथा विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा करने के लिए संगोष्ठी का आयोजन भी कर सकते हैं । इसके बाद ही इसे सी ओ एस सी को पेश किया जा सकता है । आवश्यकतास्वरूप, वर्तमान में इस पहलू को निम्न वरीयता प्राप्त विषय के अंतर्गत रखा गया है ।  
   



 
आसूचना शाखा  
   
  20.    डी सी आई डी एस (आसूचना) एक द्विस्तरीय अधिकारी हैं, जिनका डी जी, डी आई ए का भी पदनाम है और इस वर्ष के मार्च के प्रथम सप्ताह में इनकी नियुक्ति हुई । तीन महीनों की अल्प अवधि में ही शाखा ने अपने आप को संगठित किया और जुलाई तक आउटपुट देना प्रारम्भ कर दिया । इसने अपने विंग के अधीन इसे लिया है और इसकी सम्पूर्णता में पहले के डी आई पी ए सी (DIPAC) तथा सिग्नल आसूचना के अपर महानिदेशक आते हैं । बाद वाले दोनों किसी भी सूचना को सेवा आसूचना निदेशालयों को पहुंचाना जारी रखते हैं, जो उन्हें रूचिकर लगता है। इसके अतिरिक्त दिल्ली में कार्य करने वाले रक्षा अताशे जो कि हमारे अताशे भी हैं और रक्षा सलाहकार अब साथ-साथ डी जी, डी आई ए को रिपोर्ट करेंगे । डी आई ए अब पूर्णरूपेण संक्रियात्मक है और राष्ट्र के विभिन्न आसूचना संगठनों के बीच समन्वय काफी सुधर गया है, जिसमें विभिन्न सेवा आसूचना निदेशालय भी शामिल हैं ।  
   



 
अन्य शाखाएं  
   
  21.    चिकित्सा -. जी ओ एम की अनुशंसा के अनुसार, डी जी ए एम एफ एस, एक पूर्णरूपेण अन्तर सेवा संगठन को मुख्यालय आई डी एस की सम्पूर्णता के अंतर्गत आना था । सरकार ने अभी तक उन्हें अधीन करने के बारे में निर्णय नहीं लिया है और यह अब तक रक्षा मंत्रालय के अधीन स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा है ।  
   
  22.    शुद्ध आंकलन - . डी ए सी आई डी एस (शुद्ध आंकलन) का उल्लेख किया जाना चाहिए, जिसमें ब्रिगेडियर/समतुल्य रैंक का अधिकारी और इनके स्टाफ में तीन कर्नल/समतुल्य रैंक के अधिकारी होते हैं । संकल्पना के रूप में, शुद्ध आंकलन इस देश के लिए नया है । शुद्ध आंकलन की परिभाषा “राष्ट्रों के बीच उभरने वाली प्रतिस्पर्धात्मक प्रवृत्ति के विश्लेषण का कौशल और अनुशासन है, जिसमें मध्यम से दीर्घ अवधि की ओर उभरने वाले युद्धनीति के वातावरण को विस्तृत और गहरे ढंग से समझने की सोच को विकसित करने का लक्ष्य निहित है । इस विद्या में सामरिक विकास का ढांचा खोजना और भविष्य के लिए उच्चतम निर्णय निर्धारण विकल्प खोजकर मुहैया कराना है । इसका सक्रिय रूप से 1972 से अमेरिका में इस्तेमाल हो रहा है और अब कई देश इसकी उपयोगिता को महसूस कर रहे हैं और इसी तरह की अपनी प्रणाली का विकास कर रहे हैं । यह एक बेहद शक्तिशाली उपकरण है जो कई तकनीकों को नियोजित करता है जैसे, अनुरूपण, खेल-कूद, माडलिंग इत्यादि । यह आंकलन की निर्णायक पद्धति को वहन करता है ना कि शुद्ध रूप से गणितज्ञीय पद्धति का ।  
   
  23.    सिविलियन अधिकारी.

        
  (क)      एक वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति हुई है जो कि अपनी कार्यालयी क्षमता में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं । बजट प्रबन्धन पर इनकी सलाह बहुमूल्य है, विशेषकर चूंकि आरम्भ में कुछ ही अधिकारी मुख्यालय आई डी एस में तैनात हुए, जिन्हें इस क्षेत्र में शायद ही कोई व्यवहारिक अनुभव था और हमारे में से अधिकांश जॉब करते हुए ही सीख रहे थे ।

(ख)      एक वैज्ञानिक सलाहकार की भी तैनाती हुई है । रक्षा मंत्रालय से एक संयुक्त सचिव (प्रशा एवं कार्मिक) की भी तैनाती की जाएगी ।

(ग)      भारतीय विदेश सेवा से एक संयुक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय मामले) अधिकारी ने रिपोर्ट की है और कार्य कर रहा है । संयुक्त रूप से विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर उनकी चार्टर ऑफ ड्यूटी पर कार्य चल रहा है ।
 
   


 
अण्डमान और निकोबार कमान (ए एन सी)  
   
  24.    जैसा कि आप जानते हैं कि पहली एकीकृत कमान पिछले वर्ष स्थापित की गई और यह सीधे अध्यक्ष, सी ओ एस सी के अधीन है । जैसे कि बाद वाले एकीकृत स्टाफ प्रमुख, उस कमान के मामले मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के मुख्यांश के अन्तर्गत आते हैं । मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आई डी एस) की सभी शाखाएं किसी ने किसी रूप से ए एन सी के कार्यों में संलग्न हैं ।  
   


 
निष्कर्ष  
   
  25.    अभी मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ एक वर्ष से थोड़े अधिक समय से कार्य कर रहा है । इस अवधि के दौरान, सभी प्रकार की कठिनाइयों और अत्यधिक मूलभूत आवश्यकताओं की कमी के बावजूद, इसने अपने आप को सशस्त्र बलों की सच्ची भावना के साथ प्रथ-प्रदर्शक के रूप में उभारा है । यह संयुक्तता के नए मानक स्थापित कर रहा है, जहां तैनात अधिकारियों ने यह महसूस करना शुरू कर दिया है कि कुछ गौण प्रक्रियात्मक परिवर्तनों को छोड़कर, तीनों सेवाओं में मौलिक रूप से मिलते-जुलती समस्याएं हैं । मैं सोचता हूं कि इस प्रकार मिलकर कार्य करने से किसी औपचारिक प्रशिक्षण की तुलना में संयुक्त रूप से एकजुट होकर उद्देश्य प्राप्त करना कहीं बेहतर है । जिन मंचों पर सेनाओं की आवाज कभी सुनी नहीं गई, वहां सेनाओं की आवाज पहुंचाकर और उस पर कार्रवाई कर हम अपना योगदान दे रहे हैं । मैं समझता हूं कि हमारे संशोधित उच्चतम रक्षा प्रबंधन प्रणाली में हमारे मुख्यालय का यह सर्वाधिक महान योगदान है ।  


 

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